सभी की आँखें खोलने के लिए ये संदेश है...
सभी की आँखें खोलने के लिए ये संदेश है... जो मंदिर/गुरुद्वारा/धार्मिक स्थलों से लंगर को अपने घर बांध बांध कर ले जाते हैं... एक बार गुरु नानक देव जी एक नगर को गए। वहाँ सारे नगर वासी इकठे हो गए। वहाँ एक महिला भक्त श्री गुरु नानक देव जी से कहने लगी- महाराज! मैंने तो सुना है, आप सभी के दुःख दूर करते हो। मेरे भी दुःख दूर करो, मैं बहुत दुखी हूँ। मैं तो आप के गुरुद्वारे में रोज 50 रोटी अपने घर से बना कर बाँटती हूँ, फिर भी दुखी हूँ। ऐसा क्यों ? गुरु नानक देव जी ने कहा- कि तू दुसरों का दुःख अपने घर लाती हो, इस लिए दुखी हो। वो कहने लगी - महाराज! मुझे कुछ समझ नहीं आया, मुझ अज्ञानी को ज्ञान दो। गुरु नानक देव जी कहने लगे- तूं 50 रोटी गुरु द्वारे में बांटती तो हो... पर बदले में क्या ले जाती हो ? वो कहने लगी- सिर्फ आप के लंगर के सिवा और कुछ भी नहीं। (लंगर में बंट रही प्रसाद) गुरु नानक देव जी कहने लगे- लंगर का मतलब है एक रोटी खाना ओर अपने गुरु का शुकर मनाना। पर तूं तो रोज बड़ी-बड़ी थैलियों में दाल मखनी , मटर पनीर, रायता, खीर और 10-15 रोटी भर-भर के ले जाती हो। तीन दिन वो ल...